वन में स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाला मयूर नील गगन में छाए श्यामल बदलो को देख झूम उठते हैं
जल में निवास करने वाला कमल कई योजन से आ रही सूर्य की रश्मियों को निहार कर खिल उठता है।नभ में विराजमान चंद्रमा को देख सरोवर में कुमुद मुस्कुरा उठता है।
अतः जो जिसके चित्त में होता है, दूरियां बाधा नहीं बन सकती ।
प्रीय पाठक गण मैं कोई कवि नहीं हूं और न हीं मेरे पास कविता करने की प्रतिभा है।
परन्तु हृदय में भावनाओ का सागर अवश्य उमड़ता है, जब भी किसी सामाजिक स्तिथि से रुबरू होता हूं तो, हृदय उन्हें पंक्तिबद्ध करने के लिए व्याकुल हो उठता है।
अपनी टूटी फूटी भाषाओं में उसे व्यक्त करने का प्रयास किया हूं।
धन्यवाद
___रमेश
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