जय जननी, जय शारदे,मुझे उलझन से उबार दे|
जय जननी जय शारदे।।
धवल वस्त्र, अरू हंस सिंहासन,
विद्या विभूषित सुंदर भाषण|
वीणा मधुर बजाने वाली,
आकर मुझको तार दे|
जय जननी जय शारदे।।
अपरिमित धन तेरी झोली में,
बांटो मां मेरी टोली में |
वेदों की माता आकर,
मुझको संवार दे|
जय जननी जय शारदे।।
तेरी ही बल पर लेखनी उठाई है,
कुछ -कुछ रचने को मन में बनाई है|
अपनी तू शक्ति माता ,
मुझमें से उतार दे |
जय जननी जय शारदे।।
इस कलम से जो कुछ निकले,
भाषा हो इंसान की |
रुक जाए यह लेखनी,
जब वर्णन हो बेईमान की||
छोटे-छोटे शब्दों से,
पुस्तिका तू संवार दे |
जय जननी जय शारदे।।
इस कलम से जो कुछ निकले,
भाषा हो इंसान की |
रुक जाए यह लेखनी,
जब वर्णन हो बेईमान की||
छोटे-छोटे शब्दों से,
पुस्तिका तू संवार दे |
जय जननी जय शारदे।।
_____रमेश .
